भोपाल देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर बना: स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में लगाई बड़ी छलांग, नागरिकों में खुशी की लहर

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भोपाल। राजधानी भोपाल ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के परिणामों में भोपाल ने देश का दूसरा सबसे साफ शहर बनने का गौरव प्राप्त किया है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में यह उपलब्धि हासिल करते हुए भोपाल ने पिछले वर्ष की तुलना में तीन पायदान की छलांग लगाई है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

भोपाल के महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण इस सम्मान को ग्रहण करने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। भोपाल ने 12500 अंकों में से 12067 अंक अर्जित किए, और शीर्ष स्थान पर रहे अहमदाबाद से केवल 12 अंक पीछे रह गया। इस प्रदर्शन ने भोपाल को प्रदेश में पहला और देश में दूसरा स्थान दिलाया।

स्वच्छता में भोपाल की बड़ी छलांग: आंकड़ों की नजर से

  • जमीनी सर्वेक्षण में अंक: 10000 में से 9567 अंक (95.67%)

  • कचरा मुक्त शहर (GFC): 1300 में से पूरे 1300 अंक

  • खुले में शौच मुक्त (ODF): 1200 में से 1200 अंक

  • सर्टिफिकेशन स्कोर: 2500 में से 2500 अंक

हालांकि, भोपाल डंप साइट सुधार और स्रोत पृथक्करण के क्षेत्र में पिछड़ गया, जहां उसे डंपसाइट सुधार में 0% अंक मिले। इसके बावजूद अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उसे शीर्ष स्थान दिलाने में मदद की।

नगर निगम कार्यालय में जश्न का माहौल

भोपाल को मिली इस उपलब्धि के बाद नगर निगम के माता मंदिर कार्यालय में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। निगम अध्यक्ष  ने सफाई कर्मचारियों को माला पहनाकर सम्मानित किया और मिठाई खिलाकर बधाई दी। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कर्मचारियों और अधिकारियों ने जमकर जश्न मनाया। इसी तरह जोन-16 मीनल रेजिडेंसी में भी कर्मचारियों ने मिठाइयां बांटकर खुशी साझा की।

भोपाल का मजबूत कचरा प्रबंधन ढांचा

हर दिन शहर से लगभग 800 टन कचरा निकलता है, जिसमें करीब 300 टन गीला और 500 टन सूखा कचरा होता है। इसके लिए नगर निगम ने कई आधुनिक उपाय अपनाए हैं:

  • 517 डोर टू डोर (DTD) वाहन,

  • 719 सीएनजी वाहन,

  • 202 रोड स्वीपिंग वाहन प्रतिदिन तैनात हैं।

हाल ही में 250 नए सीएनजी वाहन और 6 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग वाहन जोड़े गए हैं, जिससे डोर टू डोर कचरा कलेक्शन को 100 प्रतिशत किया जा सका।

भोपाल को 7-स्टार रेटिंग और वाटर प्लस सिटी का दर्जा भी बरकरार

भोपाल को कचरा मुक्त शहरों की श्रेणी में 7 स्टार रेटिंग भी मिली है। इसके अलावा, भोपाल ने लगातार वॉटर प्लस सिटी का खिताब भी बनाए रखा है, जो यह दर्शाता है कि शहर में नालियों का पानी बिना ट्रीटमेंट के जल स्रोतों में नहीं मिलाया जाता।

भोपाल नगर निगम अब स्रोत पर कचरा पृथक्करण और डंप साइट सुधार जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की योजना बना रहा है ताकि अगली बार पहला स्थान हासिल किया जा सके। निगम की नवाचार नीति और नागरिकों की सहभागिता ही इस उपलब्धि का मुख्य आधार रही है। भोपाल की यह सफलता न केवल शहर के सफाई कर्मचारियों और नगर निगम की मेहनत का परिणाम है, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सहभागिता का भी प्रमाण है। यदि इसी तरह नगर निगम और नागरिक मिलकर काम करते रहे, तो आने वाले वर्षों में भोपाल देश का सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है।

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