60 बार फेल होने के बाद ऐसे जीती सफलता की ऐतिहासिक जंग

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एक नहीं, दो नहीं बल्कि 60 परीक्षा में फेल होने वाले सुभाष गुप्ता की कहानी हर किसी को भी मोटिवेट करेगी. वर्तमान में वह रेलवे में सेक्शन कंट्रोलर हैं. आपको बता दें, उनके लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन ये नतीजा कड़ी मेहनत और सब्र का है. आइए जानते हैं उनके बारे में. सुभाष गुप्ता ने शुरुआत में कई परीक्षाएं दीं. जिसमें बैंकिंग, SSC, रेलवे, समेत कई सरकारी नौकरियों के एग्जाम शामिल हैं, लेकिन बिहार के मधुवनी से आने वाले सुभाष को हर बार नाकामयाबी हाथ लगी. सुभाष गुप्ता ने शुरुआत में कई परीक्षाएं दीं. जिसमें बैंकिंग, SSC, रेलवे, समेत कई सरकारी नौकरियों के एग्जाम शामिल हैं, लेकिन बिहार के मधुवनी से आने वाले सुभाष को हर बार नाकामयाबी हाथ लगी. सुभाष के सफर की शुरुआत उनेक गांव से होती है. वह एक संयुक्त परिवार में रहते थे. पिता की छोटी सी दुकान थी. अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पास बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं.

सुभाष ने बताया मेरे पिताजी को मुझ पर काफी भरोसा था, लेकिन मां चाहती कि मैं पिताजी के साथ दुकान में काम करना शुरू कर दूं. मेरे पिताजी के लिए वो गर्व का पल था जब मेरी पूरे गांव में फर्स्ट डिवीजन आई थी. जिसके बाद मेरा दाखिला दरभंगा के बेस्ट कॉलेज में कराया गया.मैंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद IIT समेत कई इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने के लिए परीक्षाएं दी थी. जिसके बाद मैंने बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेज से अपना बीटेक कोर्स किया.

मेरे पिताजी अक्सर कहते थे “पढ़ो मैं हूं साथ”, सुभाष ने बताया केवल इन बातों ने मेरे अंदर हिम्मत बढ़ाई. लेकिन मेरी जिंदगी का वो ब्लैक डे था जिस दिन मुझे मालूम चला कि मेरे पिताजी नहीं रहे. मैं शब्दों में जाहिर नहीं कर सकता कि मेरे लिए वो कितना कठिन समय था. मेरे पिताजी के दुनिया से चले जाने के बाद मैं फाइनेंशियली और मेंटली दोनों रूप से परेशान था. जैसे – तैसे मैंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पैसों के लिए ट्यूशन लेने शुरू किए. जब 1000 के लिए 4 से 5 किलोमीटर दूर बच्चों को पढ़ाने जाता था. 2014 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद मुझे कोई नौकरी नहीं मिली. जिसके बाद मैंने चेन्नई जाकर ऑटोमेशन कोर्स किया. कोर्स पूरा होने के बाद मुझे 5 से 7 हजार की नौकरी मिली. जिसके बाद मुझे अपने आप पर तरस आने लगा. जिसके बाद मैंने नौकरी छोड़कर बिहार आ गया. बिहार मैंने नौकरी तलाश करना शुरू किया. क्योंकि मुझे पैसों की जरूरत थी और पैसे तभी आएंगे जब नौकरी मिलेगी. जिसके बाद मुझे एक कोचिंग सेंटर में मैथेमेटिक्स पढ़ाने के लिए नौकरी मिल गई है. सुभाष ने बताया कि दुकान में बैठने से मेरा मैथ्स अच्छा हो गया थी. जैसे मान लीजिए 18 रुपये किलो चीनी है तो 7 किलो के 126 रुपये. वहीं मैं बच्चों को भी पढ़ाता तो मेरा मैथ्स और मजबूत हो गया था. नौकरी मिलने के बाद मैंने तय कर लिया था कि मैं आगे पढूंगा. उस समय मैंने बैंकिंग, रेलवे, SSC की परीक्षा को अच्छे से समझा. इससे पहले मुझे इन परीक्षा के बारे में कुछ खास नहीं मालूम था. सुभाष ने बताया-  रेलवे, IBPS, RRB, क्लर्क RRB, SBI, रेलवे, SSC, LIC, NIACL AO की सभी परीक्षाओं का फॉर्म भरा. परीक्षा दी और सभी में फेल होते चले गए. जिसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपनी पढ़ाई को एक फ्लो नहीं दे पा रहा था. जब मैं इन सभी परीक्षा में फेल हुई तो मुझे लगा कि क्या मैं इसके लिए तैयार था. जिसके बाद मैंने हर परीक्षा को गंभीर लेने लगा. मैं लगातार परीक्षा देता रहा. एक दिन ऐसा आया कि RRB NTPC की परीक्षा में मेरा सेलेक्शन हो गया है. मेरी इस परीक्षा में 139 रैंक आई थी. इस परीक्षा के लिए 20 लाख से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था और उनमें मेरा सेलेक्शन होना किसी चमत्कार से कम नहीं था.

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