
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह ‘जुमला पार्टी’ द्वारा गढ़े गए ‘गंदे धर्म’ को नहीं मानतीं। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है, खासकर तब जब देश में आम चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक दलों के बीच सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा की हिंदुत्ववादी राजनीति पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“हम सच्चे धर्म को मानते हैं, मानवता को मानते हैं। लेकिन जुमला पार्टी ने जो गंदा धर्म बनाया है, मैं उसे नहीं मानती। धर्म का मतलब प्रेम, सद्भाव और एकता होता है, न कि नफरत और बंटवारा।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा धर्म की आड़ में राजनीति कर रही है और लोगों को बांटने का काम कर रही है। उनका कहना था कि सच्चा धर्म वह है जो सभी को एक साथ लेकर चले, न कि किसी एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काए। यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने भाजपा की विचारधारा पर हमला बोला है। उन्होंने पहले भी भाजपा को ‘बाहरी पार्टी’ करार दिया था और उस पर बंगाल की संस्कृति और परंपराओं को नष्ट करने का आरोप लगाया था।
पिछले कुछ वर्षों में ममता बनर्जी ने भाजपा के ‘जय श्री राम’ नारे के राजनीतिक इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा था कि यह नारा किसी धर्म या आस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदे के लिए गढ़ा गया है। उन्होंने भाजपा पर धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिकरण करने और समाज में असहिष्णुता बढ़ाने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी के इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के नेताओं ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया और ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा,
“ममता बनर्जी को हिंदू धर्म की समझ नहीं है। वह सिर्फ अल्पसंख्यकों के वोट पाने के लिए इस तरह के बयान देती हैं। भाजपा किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि हम सनातन संस्कृति को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।” भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा,
“ममता बनर्जी की राजनीति का आधार ही हिंदू विरोध है। उन्हें हिंदू त्योहारों से दिक्कत है, हिंदू भावनाओं से दिक्कत है, लेकिन जब चुनाव आता है तो वह मंदिरों में जाती हैं और चंडी पाठ करती हैं। यह उनकी दोहरी नीति को दर्शाता है।” ममता बनर्जी ने हमेशा खुद को धर्मनिरपेक्ष राजनीति की समर्थक बताया है। वह अल्पसंख्यकों को बराबरी का हक देने की पक्षधर रही हैं और इस मुद्दे पर भाजपा की कट्टर हिंदुत्ववादी राजनीति का विरोध करती आई हैं। उनकी सरकार ने बंगाल में दुर्गा पूजा और मुहर्रम के दौरान टकराव की कई घटनाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति झुकाव दिखाने के आरोपों का सामना किया है। ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनकी सरकार सभी धर्मों को समान सम्मान देती है। ममता बनर्जी के इस बयान का असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ सकता है। बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर चल रही है और भाजपा लगातार ममता बनर्जी को हिंदू विरोधी बताने की कोशिश कर रही है।ममता बनर्जी के इस बयान को विपक्षी दल उनके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि टीएमसी इसे भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ उनकी स्पष्टता और साहस के रूप में प्रचारित करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस बयान के बाद किस तरह की चुनावी रणनीति अपनाती है और क्या यह बयान बंगाल की राजनीति को नया मोड़ देगा।
