मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती में सिलेबस बदलाव से मचा बवाल, हजारों अभ्यर्थी हुए अयोग्य घोषित

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भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले सिलेबस और पात्रता नियमों में अचानक हुए बदलाव से अभ्यर्थियों में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने जनजातीय कार्य विभाग के तहत शिक्षक वर्ग-3 के 10,150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 1 अगस्त 2025 तक चलेगी। इसके अलावा जनजातीय विभाग के 2,939 पदों पर भी नियुक्तियां की जाएंगी। हालांकि इस प्रक्रिया की शुरुआत से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है।

सिलेबस में बड़ा बदलाव, परीक्षा से पहले बढ़ा तनाव

इस बार परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए अंग्रेज़ी भाषा का पेपर अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि पहले अभ्यर्थियों को संस्कृत और अंग्रेज़ी में से एक चुनने का विकल्प मिलता था। अब से केवल अंग्रेज़ी को ही शामिल किया गया है, जिससे हिंदी माध्यम और गैर-अंग्रेज़ी पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, सिलेबस में बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय को हटाकर अब साइंस और सोशल साइंस को शामिल कर दिया गया है। इन विषयों को कक्षा 12वीं स्तर का रखा गया है, जिससे आर्ट्स और कॉमर्स बैकग्राउंड के छात्र खुद को अयोग्य महसूस कर रहे हैं। जबकि साइंस बैकग्राउंड के छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलता दिख रहा है।

हमें पढ़ाना 5वीं तक है, सिलेबस 12वीं का क्यों?”

एक अभ्यर्थी ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, हमें प्राथमिक स्तर तक बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन तैयारी का स्तर 12वीं का कर दिया गया है। ऐसे में यह बेहद असंतुलित और अनुचित फैसला है।उन्होंने आगे कहा, मैंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की है और अब अचानक अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और गणित जैसे कठिन विषय जोड़ दिए गए हैं, जो आर्ट्स और कॉमर्स वालों के लिए भारी पड़ने वाले हैं। इससे हमारी वर्षों की मेहनत बेकार हो गई।

सिलेबस में बदलाव छह महीने पहले होना चाहिए था”

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि परीक्षा से कम से कम 6 महीने पहले सिलेबस में बदलाव की जानकारी मिलनी चाहिए थी ताकि वे तैयारी कर पाते। फिलहाल परीक्षा में सिर्फ डेढ़ महीने का समय बचा है, ऐसे में नया सिलेबस पूरा कर पाना लगभग असंभव है। एक उम्मीदवार ने कहा, हम पिछले कई सालों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। अब अचानक सिलेबस बदल दिया गया, जिससे तैयारी करने वाले और नए उम्मीदवार एक समान स्थिति में आ गए हैं। यह न्यायसंगत नहीं है।

विभाग ने साधी दूरी, जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर डाली

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) के डायरेक्टर ने इस पूरे मसले पर सफाई देते हुए कहा, सिलेबस में परिवर्तन करना हमारा नहीं, बल्कि संबंधित विभाग का काम है। MPESB केवल प्रक्रिया संचालित करता है। कोई भी निर्णय हम अकेले नहीं लेते, ये शिक्षा विभाग के साथ मिलकर तय होता है।उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की समस्या हो रही है तो वे विभाग को शीघ्र सूचित करें, जिससे समय रहते विचार किया जा सके।

प्राथमिक शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है। परीक्षा के ठीक पहले सिलेबस में बदलाव से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। खासकर वे छात्र जो लंबे समय से तैयारी में जुटे थे, अचानक नियम बदलने से हाशिए पर आ गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शिक्षा विभाग इस विरोध को देखते हुए सिलेबस में कोई संशोधन करेगा या नहीं।

 

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