प्रदेश में साइबर गैंग का खुलासा: 8 साल तक BJP नेता के बेटे को डिजिटल अरेस्ट में रख ठगे 45 लाख

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अनूपपुर, मध्य प्रदेश। आठ साल तक एक व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर उससे 45 लाख रुपये ऐंठने का सनसनीखेज मामला मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले से सामने आया है। कोतमा नगर में रहने वाले बीजेपी नेता अवधेश ताम्रकार के बेटे और इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी आशीष ताम्रकार (उम्र 53 वर्ष) को साइबर ठगों ने 2017 से लगातार मानसिक दबाव में रखकर ठगा। आरोपियों ने खुद को कभी पुलिस अधिकारी, कभी सीबीआई अफसर, जज या वकील बताकर आशीष को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी और उससे रकम ट्रांसफर कराते रहे। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित आशीष ताम्रकार ने जून 2025 में आखिरकार साहस करके पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित गिरोह था जो फर्जी पहचान, कॉल रिकॉर्डिंग, सायरन और वीडियो कॉल्स के जरिए लोगों को डिजिटल तौर पर ‘गिरफ्तार’ कर उन्हें ठगता था।

2017 में हुई शुरुआत, 23 लाख की पहली ठगी

थाना कोतमा प्रभारी के अनुसार, पीड़ित आशीष ताम्रकार वायदा बाजार (कमोडिटी ट्रेडिंग) में भी पैसा निवेश करते थे। 2017 में उन्हें 23 लाख रुपये का लाभ हुआ था। इसी दौरान नीमच थाने के अधिकारी बनकर एक शख्स ने उन्हें कॉल किया और रकम को हवाला का पैसा बताकर धमकाया। डर के मारे आशीष ने 23 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद यह सिलसिला रुकने के बजाय बढ़ता चला गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से ठग लगातार संपर्क में बने रहे और हर बार किसी न किसी नए पहचान के साथ सामने आकर दबाव बनाते रहे। आरोपी वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई या हाई कोर्ट अधिकारी बनकर सामने आते थे। कॉल के दौरान पुलिस सायरन और दबावपूर्ण भाषा का इस्तेमाल कर व्यापारी को डराते और रुपये मांगते थे।

गिरफ्तारी और गिरोह का खुलासा

जांच के बाद पुलिस ने विदिशा जिले के गिरधर कॉलोनी निवासी सौरभ शर्मा (32 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल और कई ठगी से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इस मामले में दो मुख्य आरोपी—महेंद्र शर्मा और रवि डेहरिया—अब इस दुनिया में नहीं हैं। महेंद्र शर्मा की 2022 में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। उस पर विदिशा और अन्य जिलों में 30 से अधिक मामले दर्ज थे। जबकि रवि डेहरिया की दो महीने पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें प्रदेशभर में छापेमारी कर रही हैं। इनमें खंडवा निवासी लकी कुमावत और चित्रांश ठाकुर प्रमुख हैं। पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान ने बताया कि आरोपियों का नेटवर्क भोपाल से शुरू हुआ था, जहां उन्होंने एक फर्जी कंपनी बनाई थी। जब लोगों को इसकी भनक लगी, तो यह गिरोह विदिशा भाग गया और वहां एक नई पहचान के साथ कंपनी शुरू कर दी।

डिजिटल अरेस्ट: साइबर ठगी का नया रूप

यह मामला एक नए तरह की साइबर ठगी को सामने लाता है, जिसे पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम दिया है। इसमें तकनीकी संसाधनों और मनोवैज्ञानिक हथकंडों का इस्तेमाल कर पीड़ित को ऐसा आभास कराया जाता है जैसे वह किसी गंभीर अपराध में फंसा है और उसकी गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है। पीड़ित आशीष ताम्रकार ने बताया कि वह लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहे और किसी से भी इस मामले में बात करने से डरते थे। हर बार उन्हें नए अपराध का हवाला देकर चुप रहने के लिए मजबूर किया गया।

अनूपपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि इस तरह की किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या पैसे की मांग होने पर तत्काल नजदीकी थाने में सूचना दें। ठगों के हौसले तभी पस्त होंगे जब लोग बिना डरे उनकी शिकायत करेंगे।


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