
भोपाल। राजधानी भोपाल में गुरुवार को नगर निगम की सदन बैठक एक बार फिर राजनीति का अखाड़ा बन गई। बैठक में शहर के कुछ क्षेत्रों, संस्थानों और स्थलों के नाम बदलने को लेकर जमकर बहस और हंगामा हुआ। माहौल तब और भावनात्मक हो गया जब एक महिला पार्षद अपने दिवंगत पिता का नाम लेते हुए रो पड़ीं। वहीं, नवाब को लेकर दिए गए बयान पर ‘गद्दार’ शब्द के इस्तेमाल ने सदन की गरिमा को झकझोर दिया और विपक्ष ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
बैठक की शुरुआत और नामकरण प्रस्ताव
नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत भोपाल को स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर में दूसरा स्थान मिलने पर महापौर मालती राय द्वारा बधाई संदेश के साथ हुई। इसके बाद प्रश्नकाल में पार्षदों के सवाल-जवाब हुए। कुछ देर बाद एजेंडा सामने आते ही माहौल गर्म हो गया।
इस बैठक में नाम बदलने से जुड़े कई प्रस्ताव रखे गए, जिनमें तीन प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पारित किए गए। इनमें शामिल थे:
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ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर “रामबाग” किया जाना
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विवेकानंद पार्क के समीप चौराहे का नाम “विवेकानंद चौराहा” किया जाना
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25 करोड़ की लागत से छह नए विसर्जन कुंडों का निर्माण
ये प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए, लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूलों के नाम बदलने का प्रस्ताव सदन के सामने रखा गया।
भावुक हुई पार्षद, पिता का नाम लेते हुए रो पड़ीं
बीजेपी पार्षद प्रियंका शर्मा ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व विधायक स्व. रमेश शर्मा के सम्मान में हमीदिया कॉलेज का नाम बदलकर उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव पेश किया। पिता की याद में जब उन्होंने प्रस्ताव पढ़ा तो वे मंच पर ही भावुक हो गईं और उनके आंसू छलक पड़े। यह दृश्य सदन में बैठे कई सदस्यों को भी भावनात्मक कर गया। लेकिन इसके तुरंत बाद विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
“गद्दार” शब्द पर गरमा गई राजनीति
विवाद तब और गहरा गया जब निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बैठक में कहा – “भोपाल का नवाब गद्दार था, गद्दार है और गद्दार रहेगा।”
इस बयान ने कांग्रेस पार्षदों को आगबबूला कर दिया। उन्होंने तुरंत निगम अध्यक्ष से अपना बयान वापस लेने की मांग की और ‘गद्दार’ शब्द को कार्यवाही से हटाने की मांग करते हुए अध्यक्ष की आसंदी को घेर लिया।
कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष सबिस्ता ज़की ने इसे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करार देते हुए कहा कि, “इतिहास से छेड़छाड़ करके सांप्रदायिक भावनाएं भड़काई जा रही हैं। नवाबों का इतिहास किसी एक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।
विरोध इतना तीव्र हो गया कि सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे और सदन में हंगामा
इस बीच बैठक में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगे। बीजेपी पार्षदों ने इसे सांस्कृतिक गौरव की वापसी बताया जबकि कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए इसे मुद्दों से भटकाने वाला कदम बताया।
जनता से जुड़े मुद्दे रह गए पीछे
नामकरण विवाद और राजनीतिक नारेबाजी के चलते जनता से जुड़े कई अहम मुद्दे बैठक में गौण हो गए। विपक्ष का आरोप है कि जनकल्याण से जुड़े एजेंडे को दरकिनार कर सत्तापक्ष केवल भावनात्मक और विवादित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अब ये नाम होंगे नए
हालांकि हंगामे के बीच तीन नाम परिवर्तन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दी गई:
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ओल्ड अशोका गार्डन का नाम अब “रामबाग” होगा।
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विवेकानंद पार्क के पास का चौराहा अब “विवेकानंद चौराहा” कहलाएगा।
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6 नए विसर्जन कुंड बनाए जाएंगे, जिन पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
नगर निगम की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि शहर की राजनीति अब प्रतीकात्मक मुद्दों की ओर तेजी से बढ़ रही है। भावनात्मक जुड़ाव, ऐतिहासिक नाम और पहचान के सवालों को लेकर आगे और भी तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस विवाद के बाद जनता के असल मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीरता से काम करेगा या नहीं।










