
छतरपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर रविकांत को भारी पड़ गया है। छतरपुर जिले के बमीठा थाना में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि प्रोफेसर की टिप्पणी से न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द भी खतरे में पड़ा है।
सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट से शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत तब हुई जब छतरपुर पुलिस ने एक एम्बुलेंस को रोका, जिसमें कुछ महिलाएं सवार थीं। पूछताछ में पता चला कि ये महिलाएं अपनी पहचान छिपाकर बागेश्वर धाम में रह रही थीं, और उन पर अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह जताया गया। इस संदिग्ध घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसी वीडियो को लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत ने भी ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री को निशाने पर लिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
“नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित छोटा भाई धीरेन्द्र शास्त्री धर्म की आड़ में महिला तस्करी कर रहा है!”
इस बयान में उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को “महिला तस्कर” कहा, जिससे विवाद गहराता चला गया।
बागेश्वर धाम सेवा समिति ने दर्ज कराई शिकायत
प्रोफेसर रविकांत की इस टिप्पणी के विरोध में बागेश्वर धाम सेवा समिति के सदस्य धीरेंद्र कुमार गौर ने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। गौर का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणी न केवल झूठ और भ्रामक है, बल्कि यह लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह पोस्ट सोच-समझकर धार्मिक उन्माद फैलाने और समाज में अशांति उत्पन्न करने के उद्देश्य से की गई है। पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए प्रोफेसर रविकांत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनके सोशल मीडिया पोस्ट को जांच के तहत सबूत के तौर पर संकलित किया जा रहा है।
पुलिस ने शुरू की जांच, प्रोफेसर की भूमिका की हो रही है पड़ताल
छतरपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा सके। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या यह पोस्ट किसी अभियान या सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। प्रोफेसर रविकांत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक स्तर पर चर्चा शुरू कर दी है।
यह मामला देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावना के टकराव की एक नई मिसाल बनता दिख रहा है। जहां एक ओर कुछ लोग प्रोफेसर रविकांत की टिप्पणी को बोलने की आज़ादी के तहत देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर धाम के अनुयायियों का मानना है कि यह धार्मिक मर्यादाओं के विरुद्ध और दुर्भावनापूर्ण बयान है।










