बिल पेश और विपक्ष का प्रहार: MP विधानसभा में मेट्रोपॉलिटन विधेयकों पर मंथन, वन अधिकार पर तीखी बहस के आसार

0
507
WAY NEWS
WAY NEWS

भोपाल,मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से दोबारा शुरू हो रहा है। दो दिवसीय अवकाश के बाद अब सदन की कार्यवाही फिर से तेज़ होगी, जिसमें कई अहम मुद्दों पर बहस और विधायी प्रक्रिया देखने को मिलेगी। खासतौर पर भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन रीजन घोषित करने से संबंधित प्रस्तावों को लेकर विधानसभा की कार्यवाही पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। इसके साथ ही विपक्ष आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है।

भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन विधेयक पर होगी चर्चा

सरकार आज सदन में भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से संबंधित विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है। इस विधेयक के ज़रिए राजधानी भोपाल और इंदौर के आसपास के क्षेत्रों — जैसे विदिशा, सीहोर, राजगढ़, देवास और उज्जैन के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। इसका उद्देश्य इन शहरी क्षेत्रों के समन्वित और सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना है।

सरकार का मानना है कि इससे नगर नियोजन, अधोसंरचना विकास, सार्वजनिक परिवहन और प्रशासनिक सेवाओं के समुचित क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। राज्य सरकार शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इन क्षेत्रों में विशेष विकास मॉडल लागू करने की दिशा में कदम उठा रही है।

विधानसभा में आज पेश होंगे कुल 6 विधेयक

भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन से संबंधित विधेयकों के अलावा विधानसभा में कुल छह विधेयक आज पेश किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  1. कारखाना (संशोधन) विधेयक, 2025 – राज्य में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव।

  2. मध्यप्रदेश दुकान तथा स्थापना (संशोधन) विधेयक, 2025 – कार्यस्थलों पर श्रमिकों के अधिकार और सुविधा से संबंधित बदलाव।

  3. मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2025 – मोटर वाहनों पर लगने वाले कर में संशोधन का प्रस्ताव।

  4. मध्यप्रदेश समाज के कमजोर वर्गों के लिए विधिक सहायता तथा विधिक सलाह (निरसन) विधेयक, 2025 – पुराने विधिक सहायता अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव।

  5. मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025 – उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधारने से संबंधित प्रावधान।

वन अधिकार कानून पर विपक्ष का हमला तेज

इस सत्र में विपक्ष की ओर से आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक अजय सिंह और डॉ. हिरालाल अलावा राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में वन अधिकार के तहत दायर दावों को खारिज किए जाने का मुद्दा नियम 138 के तहत उठाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आदिवासियों के अधिकारों को नजरअंदाज कर रही है और योजनाबद्ध तरीके से उनके कानूनी अधिकार छीने जा रहे हैं। इस मुद्दे पर वन राज्य मंत्री से सीधा जवाब मांगा जाएगा कि आखिर किन आधारों पर इतने बड़े पैमाने पर दावे खारिज किए गए और प्रभावित परिवारों के लिए क्या वैकल्पिक योजना है।

जनहित याचिकाएं और स्थानीय मुद्दे भी होंगे चर्चा में

इस दिन की कार्यवाही के दौरान कुल 81 याचिकाएं सदन में प्रस्तुत की जाएंगी। ये याचिकाएं प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़ी हैं और इनमें सड़कों की हालत, पुल निर्माण, बिजली आपूर्ति, पुलिस चौकियों की स्थापना, स्कूल भवनों की कमी और अन्य नागरिक सुविधाओं की मांग शामिल है।

वहीं, भाजपा विधायक रमेश प्रसाद खटीक बिजली चोरी से संबंधित प्रकरणों में लोक अदालत के जरिए निपटारे के बाद भी ब्याज राशि नहीं हटाए जाने के मामले में ऊर्जा मंत्री से स्पष्टीकरण की मांग करेंगे

नजर इस पर भी:

  • क्या भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन बनने से ज़मीन अधिग्रहण बढ़ेगा?

  • वन अधिकार अधिनियम में खारिज दावों की पुन: समीक्षा की मांग

  • कमजोर वर्गों के लिए विधिक सहायता अधिनियम को निरस्त करने पर सवाल                                          इस सत्र में जहां सरकार विकास योजनाओं के दम पर अपनी नीति स्पष्ट करने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष जन और जनजातीय मुद्दों को आधार बनाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा। देखना होगा कि सदन में किसका पलड़ा भारी रहता है।

Publishers Advertisement