अमित शाह ने रचा इतिहास: देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गृह मंत्री बने, आडवाणी को पछाड़ा

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नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अब तक के सबसे लंबे समय तक गृह मंत्रालय संभालने वाले मंत्री का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 4 अगस्त 2025 को उन्होंने 2,258 दिन का कार्यकाल पूरा किया, जिससे वह लालकृष्ण आडवाणी के 2,256 दिनों के रिकॉर्ड को पार कर गए हैं।

🔹 370 हटाने से शुरू हुई थी ऐतिहासिक पारी

अमित शाह ने 30 मई 2019 को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृह मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके ठीक दो महीने बाद, 5 अगस्त 2019 को उन्होंने संसद में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया। यह कदम न केवल उनकी राजनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे में एक बड़ा बदलाव भी साबित हुआ।

इस निर्णय के बाद से शाह ने गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी को केवल प्रशासनिक दायरे में न रखकर, उसे नीतिगत और रणनीतिक मोर्चे पर भी सशक्त किया। उन्होंने NIA, UAPA, CAA, NRC, जैसे कई अहम और संवेदनशील विषयों पर निर्णय लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा नीति को नई दिशा दी।

संसद में सटीक जवाब, विपक्ष पर तीखे प्रहार

अमित शाह की कार्यशैली की एक प्रमुख विशेषता उनकी सटीक, तथ्यों पर आधारित और प्रभावशाली वक्तृता है। संसद हो या जनसभा, उन्होंने बार-बार विपक्ष के तीखे सवालों का निर्भीकता से सामना किया। उनकी रणनीतियां और नीतियां नक्सलवाद, आतंकवाद, ड्रग माफिया, साइबर क्राइम जैसे क्षेत्रों में केंद्र सरकार को मजबूत बनाती रही हैं।

🔹 गृह मंत्रालय के दिग्गजों में अब टॉप पर शाह

देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री रहने वालों की सूची में अब अमित शाह शीर्ष पर हैं। उनसे पहले:

  • लालकृष्ण आडवाणी: 19 मार्च 1998 – 22 मई 2004 (2,256 दिन)

  • गोविंद बल्लभ पंत: 10 जनवरी 1955 – 7 मार्च 1961 (6 साल 56 दिन)

अब शाह ने यह मुकाम पार कर यह साबित कर दिया है कि वे न केवल संगठन के मास्टरमाइंड हैं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी उतने ही सक्षम और निर्णायक हैं।

🔹 पीएम मोदी की विशेष सराहना

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एनडीए की संसदीय बैठक में अमित शाह की खुले मंच से सराहना की। संसद पुस्तकालय भवन में हुई इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा, “गृह मंत्री के रूप में अमित शाह ने देशहित में कई कठिन निर्णय लिए और उन्हें दृढ़ता से लागू किया। उनकी यह सेवा राष्ट्र के लिए प्रेरणा है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रिकॉर्ड केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अमित शाह के लिए भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के संकेत भी हो सकते हैं। पार्टी संगठन के साथ-साथ शासनतंत्र में उनकी पकड़ और निर्णय लेने की क्षमता ने उन्हें भाजपा में एक केन्द्रिय स्तंभ के रूप में स्थापित किया है।

अमित शाह अब सिर्फ एक मंत्री नहीं, बल्कि एक युग निर्माता नेता बन चुके हैं। उनके फैसलों ने न केवल देश की सुरक्षा नीति को बदला है, बल्कि भारत की संघीय संरचना को भी एक नई परिभाषा दी है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस अनुभव को नई राजनीतिक ऊंचाइयों में बदलते हैं — शायद देश की शीर्ष नेतृत्व भूमिका की ओर।

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