स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश की जेलों से 156 बंदी रिहा, DG जेल ने की नई शुरुआत की अपील

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भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे 156 बंदियों को रिहा किया गया। इनमें छह महिला बंदी भी शामिल हैं। जेल मुख्यालय द्वारा जारी आदेशों के तहत यह रिहाई प्रदेश सरकार की विशेष नीति और नियमों के अनुरूप की गई।

अच्छे आचरण के आधार पर मिली रिहाई

सूत्रों के अनुसार जिन बंदियों को रिहा किया गया है, उन्हें जेल में निरुद्ध रहने के दौरान अच्छे आचरण, उम्र और जेल के अंदर किए गए कार्यों के आधार पर चयनित किया गया। नियमों के तहत प्रत्येक वर्ष कुछ विशेष अवसरों पर बंदियों की सजा में माफी दी जाती है। हालांकि, बलात्कार, पाक्सो और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कैदियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

पुनर्वास के लिए दी गई ट्रेनिंग

रिहा किए गए बंदियों को जेल में रहते हुए टेलरिंग, लुहारी, भवन निर्माण, सामग्री निर्माण, कारपेंट्री जैसी कई व्यावसायिक ट्रेनिंग प्रदान की गई। अधिकारियों का मानना है कि रिहा होने के बाद यह कौशल उनके पुनर्वास और जीविकोपार्जन में मदद करेगा।

DG जेल वरुण कपूर की अपील

महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं डॉ. वरुण कपूर ने रिहा हुए बंदियों से अपील करते हुए कहा कि –
“अब वे समाज में लौटकर किसी भी प्रकार का अपराध न करें। जेल में रहते हुए जो कौशल और प्रशिक्षण उन्होंने प्राप्त किया है, उसका उपयोग अपने परिवार की जीविका चलाने और समाज के नव-निर्माण में करना चाहिए।”

जेल मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार –

  • भोपाल केंद्रीय जेल से 25 बंदी

  • सतना से 17 बंदी

  • उज्जैन से 14 बंदी

  • नर्मदापुरम से 11 बंदी

  • बड़वानी से 3 बंदी

  • ग्वालियर से 16 बंदी

  • जबलपुर से 14 बंदी

  • रीवा से 19 बंदी

  • सागर से 14 बंदी

  • नरसिंहपुर से 6 बंदी

  • इंदौर केंद्रीय जेल से 10 बंदी

  • देवास से 1 बंदी

  • टीकमगढ़ से 2 बंदी

  • इंदौर जिला जेल से 2 बंदी

  • उप जेल पवई और बंडा से 1-1 बंदी रिहा किए गए।

प्रदेश की रिहाई नीति

मध्य प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को प्रति वर्ष पांच विशेष अवसरों पर पात्रता अनुसार रिहाई दी जाती है। यह अवसर हैं –

  1. स्वतंत्रता दिवस

  2. गणतंत्र दिवस

  3. डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती

  4. गांधी जयंती

  5. राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर)

इस विशेष पहल के माध्यम से न केवल बंदियों को नया जीवन आरंभ करने का अवसर दिया जा रहा है, बल्कि समाज में उनके पुनर्वास और सकारात्मक योगदान को भी सुनिश्चित किया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर मिली यह विशेष माफी, कई बंदियों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।

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