तीन साल में साइबर ठगी से मध्य प्रदेश के लोग गंवा चुके 1500 करोड़, पुलिस सिर्फ 10% रकम ही रोक पाई

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भोपाल। मध्य प्रदेश में साइबर अपराध की रफ्तार इतनी तेज़ हो चुकी है कि अब यह संगठित अपराध का रूप ले चुका है। पिछले तीन वर्षों में प्रदेशवासियों से लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस और जांच एजेंसियां पीड़ितों को 10 प्रतिशत रकम भी वापस नहीं दिलवा पाई हैं। ठग लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं और उनके मास्टरमाइंड अक्सर दूसरे देशों में बैठे होते हैं, जिससे इन्हें पकड़ना और भी मुश्किल हो जाता है।

ठगी के नए तरीके – “फुलप्रूफ” प्लान से काम कर रहे ठग

साइबर अपराधियों ने लोगों को फंसाने के लिए नई-नई तकनीकें ईजाद कर ली हैं। कभी फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी मुनाफा देने का झांसा, कभी कोरियर कंपनी की फ्रेंचाइजी, तो कभी बैंकिंग धोखाधड़ी – हर बार ठग ऐसी योजनाएं तैयार करते हैं जिन्हें पकड़ पाना आसान नहीं। रकम की हेराफेरी इतनी तेज़ी से होती है कि पुलिस के पास कार्रवाई के लिए वक्त ही नहीं बचता।

ठगी के प्रमुख मामले और नुकसान

  • साइबर फ्रॉड: पिछले पाँच साल में प्रदेश में 1054 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। इनमें से केवल 105 करोड़ रुपये बैंकों में फ्रीज कराए गए और 1.94 करोड़ रुपये ही पीड़ितों को लौटाए गए।

  • फॉरेक्स ट्रेडिंग ठगी: विदेशी मुद्रा में निवेश कर महीने में 8% तक मुनाफे का लालच देकर प्रदेश के लोगों से 200 करोड़ रुपये ठगे गए। अब तक एक रुपये की भी वसूली नहीं हो पाई।

  • कोरियर कंपनी फ्रेंचाइजी घोटाला: कोरियर कंपनी खोलने का सपना दिखाकर 250 करोड़ रुपये हड़पे गए। अब तक सिर्फ 12 पीड़ित सामने आए हैं और संभावना है कि वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो। एसटीएफ अब तक किसी भी आरोपी को पकड़ नहीं पाई है।

पुलिस क्यों नाकाम?

  • सीमित संसाधन: साइबर अपराध से निपटने वाली एसटीएफ में सिर्फ 205 अधिकारी-कर्मचारी हैं। हाल ही में इनमें से 26 की प्रतिनियुक्ति पूरी होने के बाद वे भी रिलीव हो गए।

  • विलंबित रिपोर्टिंग: अधिकांश पीड़ित देर से शिकायत करते हैं। रकम तुरंत ही 10-12 हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों (म्यूल अकाउंट्स) में भेज दी जाती है और वहीं से और हिस्सों में बांटकर आगे ट्रांसफर हो जाती है। पूरा खेल मिनटों में होता है।

  • अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: कई मास्टरमाइंड विदेशी देशों में बैठे होते हैं, जिन्हें भारत लाना कानूनी और राजनयिक स्तर पर जटिल हो जाता है।

अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

ए. साई मनोहर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम:
“साइबर अपराध अब संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। राशि ट्रांसफर होते ही चंद मिनटों में कई खातों में बांट दी जाती है, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।”

शोभित चतुर्वेदी, साइबर एक्सपर्ट:
“शिकायत जितनी जल्दी दर्ज की जाएगी, राशि फ्रीज होने की संभावना उतनी बढ़ जाएगी। 1930 हेल्पलाइन पर कई बार कॉल वेटिंग रहती है, ऐसे में तुरंत cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत करना सबसे बेहतर है। साथ ही, पुलिस के पास पर्याप्त और प्रशिक्षित अमले की भारी कमी है।”

जनता के लिए चेतावनी

साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा उपाय है सतर्कता। किसी भी लिंक, कॉल या निवेश के झांसे में आए बिना उसकी सत्यता की जांच करें। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत शिकायत करें।

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