
इंदौर। शहर के चंदन नगर क्षेत्र में सड़कों के नाम बदलने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रातोरात पुराने और प्रचलित नामों को बदलकर नए बोर्ड लगाए गए, जिससे स्थानीय रहवासी भड़क उठे। मामला बढ़ने पर नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बोर्ड हटवा दिए और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जिम्मेदार पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा कर दी।
पुराने नाम हटाकर नए लगाए गए
चंदन नगर इलाके की कई सड़कें लंबे समय से स्थानीय नामों से पहचानी जाती हैं। इनमें चंदू वाला रोड, लोहा गेट रोड, मिश्रा रोड और आम वाला रोड प्रमुख हैं। हाल ही में इनका नाम बदलकर क्रमशः गौसिया रोड, रजा गेट, ख्वाजा रोड और हुसैन रोड कर दिया गया। क्षेत्रवासियों के अनुसार, यह बदलाव रातों-रात किया गया और अचानक नए नामों वाले बोर्ड लगा दिए गए।
रहवासियों का विरोध और बवाल
बोर्ड लगते ही लोगों में नाराजगी फैल गई। कई दशकों से इन सड़कों को उनके पुराने नामों से पहचानने वाले रहवासियों ने विरोध जताया और इसे एकतरफा फैसला बताया। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर हंगामा खड़ा हो गया। पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भी महापौर को पत्र लिखकर मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।
निगम की सख्ती और महापौर का बयान
सूचना मिलते ही नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और सभी नए बोर्ड हटवा दिए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा—
“एमआईसी की अनुमति के बिना सड़क नामकरण पूरी तरह असंवैधानिक है। पार्षद फातमा रफीक खान द्वारा लगाए गए अवैध बोर्ड कानून का उल्लंघन हैं। इस पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और आगे भी ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
पार्षद का पलटवार: ‘नाम दशकों से प्रचलित’
हालांकि विवादों के केंद्र में आई पार्षद फातमा रफीक खान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है—
“ये नाम आज से नहीं बल्कि दशकों पुराने हैं। चंदन नगर बसने के समय से ही लोग इन्हीं नामों से सड़कों को जानते हैं। जो बोर्ड हटाए गए, वे भी नगर निगम की अनुमति से ही लगाए गए थे।”
कांग्रेस नेता रफीक खान ने भी पार्षद का समर्थन करते हुए कहा कि यह पूरा विवाद राजनीतिक रूप से हवा दी जा रही है।
पूर्व विधायक ने मांगी कार्रवाई
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा—
“नगर निगम को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया गया था कि अवैध रूप से बदले गए बोर्ड तत्काल हटाए जाएं। निगम ने कार्रवाई कर दी है, लेकिन जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाना भी जरूरी है।”
फिलहाल नगर निगम ने विवादित बोर्ड हटा दिए हैं और मामला पुलिस तक पहुंचाने की तैयारी है। रहवासियों की मांग है कि पुराने नामों को यथावत रखा जाए, ताकि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान बनी रहे। वहीं, पार्षद और निगम के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद इंदौर की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।










