मध्य प्रदेश में अवैध उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई, एक साल में दर्ज हुए 11 हजार से अधिक मामले

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मध्य प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर नकेल कसने के लिए सरकार ने सख्ती दिखाई है। पिछले एक वर्ष के भीतर प्रदेशभर में कुल 10,956 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश मामलों में केवल जुर्माने की कार्रवाई ही की गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध उत्खनन के गंभीर मामलों में कैद और कठोर सजा का भी प्रावधान है, तब केवल जुर्माने तक सीमित कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होगी।

गंभीर घटनाओं ने खींचा ध्यान

प्रदेश में अवैध खनन की समस्या किस हद तक विकराल हो चुकी है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई बार खनिज विभाग की टीम या पुलिस पर जानलेवा हमले तक हो जाते हैं। पिछले वर्ष भिंड जिले में अवैध उत्खनन रोकने गए एक प्रशिक्षु पुलिस अधिकारी की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

आंकड़े बताते हैं स्थिति

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 से अब तक प्रदेश में—

  • 1,565 मामले अवैध उत्खनन के

  • 8,540 मामले अवैध परिवहन के

  • 851 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए हैं।

इन कार्रवाइयों से सरकार ने कुल 83 करोड़ 74 लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया है।

अवैध रेत खदानें बनीं बड़ी चुनौती

प्रदेश में फिलहाल 728 वैध रेत खदानें संचालित हैं, लेकिन इसके साथ ही 200 से अधिक अवैध खदानें भी सक्रिय हैं। भोपाल, ग्वालियर, रीवा, सीधी और छतरपुर जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई ठेकेदारों ने अनुमति से अधिक रेत का उत्खनन और भंडारण किया है। अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तय किया है कि जहां अतिरिक्त भंडारण मिलेगा, वहां जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के निर्देश पर चला अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में प्रदेशभर में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, खरगोन, हरदा और शहडोल सहित कई जिलों में बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान करीब 200 मामले दर्ज हुए और डंपर, पोकलेन मशीनें व पनडुब्बियां जब्त की गईं। साथ ही 1.25 करोड़ रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल जुर्माने से अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल है। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब अपेक्षा की जा रही है कि सरकार कठोर दंडात्मक प्रावधानों को लागू करे, ताकि खनन माफियाओं पर वास्तविक दबाव बनाया जा सके।

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