
||श्योपुर|| मध्य प्रदेश के पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने और उनके भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत काले हिरण और नीलगाय को पार्क में पुनर्वासित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल चीतों के अनुकूल वातावरण तैयार करेगी, बल्कि उनके दीर्घकालिक संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होगी।
चीतों का मुख्य आहार हिरण, नीलगाय और अन्य छोटे जंगली जानवर होते हैं। वर्तमान में, कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें भोजन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने अन्य अभयारण्यों और जंगलों से काले हिरण और नीलगाय लाकर कूनो में बसाने की योजना बनाई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चीतों को प्राकृतिक शिकार नहीं मिलेगा, तो वे या तो भटक सकते हैं या मानव बस्तियों के करीब जाकर पालतू जानवरों का शिकार कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यह कदम न केवल चीतों की आहार श्रृंखला को बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने में भी मदद करेगा।
वन विभाग की तैयारी और योजना
वन विभाग ने इस योजना के तहत चयनित काले हिरण और नीलगायों को चरणबद्ध तरीके से कूनो में बसाने की योजना बनाई है। इसके लिए उन्हें पहले एक संगरोध (क्वारंटीन) क्षेत्र में रखा जाएगा, जहां वे नए माहौल के अनुकूल हो सकें। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण और उनकी सफल पुनर्स्थापना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार के निरंतर प्रयास
चीतों को भारत में दोबारा बसाने की योजना के तहत पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाने के बाद, सरकार अब उनकी आबादी बढ़ाने और उनके प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है।
पिछले कुछ महीनों में, वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई संगठनों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, जिनमें प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया था। सरकार की यह पहल उन्हीं सुझावों पर अमल का हिस्सा है।
संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
काले हिरण और नीलगायों का पुनर्वास न केवल चीतों के लिए, बल्कि पूरे कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए लाभदायक होगा। यह कदम भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है और इससे चीतों के सफल पुनर्स्थापना कार्यक्रम को भी मजबूती मिलेगी।
