
देशभर में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान पहले बिहार में प्रारंभ किया गया था और अब इसे अगस्त 2025 से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना और नए योग्य मतदाताओं को शामिल करना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया भारत के लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत करने के लिए जरूरी है।
बिहार में 99.86% मतदाताओं का डेटा कवर, 64 लाख नाम हटने की संभावना
बिहार में 25 जून से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के दौरान अब तक 7.23 करोड़ यानी 99.86% मतदाताओं का डेटा कवर किया जा चुका है। निर्वाचन आयोग के आकलन के अनुसार, पुरानी मतदाता सूची से लगभग 64 लाख नाम हटना तय है। इसमें वे नाम शामिल हैं जिनके फॉर्म वापस नहीं हुए हैं, या जिनमें घुसपैठियों, दोहरी प्रविष्टियों और फर्जी मतदाताओं की पहचान हुई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि,
“अगर किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से छूट भी जाता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। 1 सितंबर तक एनुमरेशन फॉर्म भरकर अपना नाम सूची में जोड़ा जा सकता है।”
अब देश के सभी राज्यों में चलेगा SIR अभियान
सूत्रों की मानें तो SIR की राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद तारीख के आधिकारिक ऐलान के साथ होगी। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को संविधानसम्मत और जनहित में बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए उठाया गया है।
विपक्ष का विरोध, आयोग का जवाब
कुछ विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को ‘नागरिकता की आड़ में वोटर पहचान का परीक्षण‘ बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों से मतदान का अधिकार छीना जा सकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा है:
“क्या पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा बनाई जा रही शुद्ध मतदाता सूची, निष्पक्ष चुनाव और एक मजबूत लोकतंत्र की नींव नहीं है?”
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR के तहत मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता रद्द होने का संकेत नहीं है। लेकिन यदि किसी पर संदेह होता है, तो निर्वाचन अधिकारी उचित दस्तावेज मांग सकते हैं, ताकि वोटिंग अधिकार का दुरुपयोग रोका जा सके।
कानूनी आधार और संवैधानिक जिम्मेदारी
चुनाव आयोग ने 24 जून को ही बिहार में SIR की प्रक्रिया का आदेश जारी किया था, जो 26 जुलाई तक चलेगी। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के प्रावधानों के तहत संचालित हो रही है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की अखंडता बनाए रखना मुक्त और निष्पक्ष चुनाव की मूलभूत आवश्यकता है।
भारत में हर मतदाता की भागीदारी लोकतंत्र की आत्मा है। SIR अभियान के माध्यम से चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी फर्जी, मृत या अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में न रहे और हर वास्तविक नागरिक को वोट डालने का संवैधानिक अधिकार मिले। आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू होगी, और मतदाताओं से समय पर फॉर्म भरने की अपील की जा रही है ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर सकें।










