
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े आपराधिक मामलों में न्याय की गाड़ी अभी भी पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाई है। हादसे को चार दशक बीत चुके हैं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ दायर आपराधिक अपील अब भी अधर में लटकी हुई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने इस देरी पर नाराज़गी जताते हुए भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय को आदेश दिया है कि लंबित अपील की सुनवाई त्वरित गति से की जाए और हर महीने प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
याचिका का संदर्भ
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2010 में भोपाल जिला न्यायालय ने गैस त्रासदी से जुड़े कुछ आरोपियों को सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने अपील दायर की थी, लेकिन डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी इस अपील का निपटारा नहीं हो सका। समिति की ओर से यह भी कहा गया कि न्यायिक प्रक्रिया में यह अनावश्यक देरी पीड़ितों के साथ अन्याय है और न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि “हम 40 साल तक मामले लंबित नहीं रख सकते।” अदालत ने कहा कि यदि आरोपियों की अपील समय पर नहीं सुनी जाती है तो यह पीड़ितों के अधिकारों का हनन होगा।
शासन और सीबीआई का पक्ष
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। वर्तमान में एक आपराधिक अपील और एक विविध आपराधिक प्रकरण अब भी लंबित है। इनमें से एक अपील दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत आरोपियों को “फरार” घोषित करने से जुड़ी है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी अक्टूबर 2023 से अदालत में उपस्थित हो रहा है, इसके बावजूद अब तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण का निपटारा करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देशित किया कि वह लंबित अपील की सुनवाई में तेजी लाए और प्रत्येक माह प्रगति रिपोर्ट पेश करे। इन रिपोर्टों की जांच हाईकोर्ट का प्रशासनिक न्यायाधीश करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
याचिकाकर्ता समिति की ओर से अधिवक्ता राजेश चंद्र ने दलील दी कि इतने वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ितों के साथ यह अन्याय है। यदि अपील का शीघ्र निराकरण नहीं होता है तो न्यायिक प्रक्रिया का भरोसा कमजोर होगा।
गौरतलब है कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। इस त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग आज भी इसके दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। वर्ष 2010 में जिला न्यायालय ने कुछ आरोपियों को सजा सुनाई थी, लेकिन अपील लंबित रहने के कारण पीड़ितों को अब भी न्याय की प्रतीक्षा है।










