भोपाल गैस त्रासदी: डॉव केमिकल की याचिका खारिज, अब भोपाल अदालत में ही चलेगी सुनवाई

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भोपाल। 1984 में हुई भीषण भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। भोपाल की अदालत ने अमेरिकी कंपनी डॉव केमिकल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने मामले को भोपाल से इंदौर स्थित सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भोपाल की अदालत को इस मामले में पूरी कानूनी अधिकारिता प्राप्त है और सुनवाई आगे भी यहीं जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है।

डॉव केमिकल ने दी थी क्षेत्राधिकार पर चुनौती

डॉव केमिकल के वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालत में तर्क दिया कि भारत की कोई भी अदालत, विशेषकर भोपाल की जेएमएफसी अदालत, अमेरिका में स्थित उनकी कंपनी पर अधिकार नहीं रखती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भारतीय अदालत इस मामले की सुनवाई कर सकती है, तो वह सिर्फ इंदौर की सीबीआई अदालत हो सकती है। हालांकि, यह दलील कंपनी के पहले रुख के विपरीत थी। पूर्व में डॉव का दावा था कि भारत की कोई भी अदालत उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती।

अदालत का दो टूक फैसला: सुनवाई भोपाल में ही होगी

जेएमएफसी (Judicial Magistrate First Class) हेमलता अहिरवार ने बुधवार को सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि चूंकि त्रासदी का केंद्र भोपाल था, इसलिए यह मामला भोपाल की अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने डॉव की याचिका को निरस्त करते हुए यह भी दोहराया कि कंपनी बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जवाब नहीं दे रही थी, जिस कारण उसे भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है।

डॉव को छह बार समन, जवाब मिला सातवें नोटिस पर

गौरतलब है कि अदालत द्वारा डॉव केमिकल को छह बार समन भेजे गए, लेकिन कंपनी ने इन पर कोई जवाब नहीं दिया। सातवां नोटिस जब अमेरिका स्थित मुख्यालय भेजा गया, तब जाकर कंपनी ने प्रतिक्रिया दी। इस व्यवहार पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।

अदालत किन मुद्दों पर करेगी विचार?

अदालत अब इस आपराधिक मामले में तीन प्रमुख बिंदुओं पर सुनवाई करेगी:

  1. क्या भारत में डॉव केमिकल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है?

  2. क्या यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन (UCC) के अधिग्रहण के बाद डॉव भोपाल गैस त्रासदी की उत्तरदायी है?

  3. बीजीआईए द्वारा दाखिल 2024 के आवेदन में उठाए गए मुद्दे, जिसमें डॉव और UCC के बीच हुए व्यावसायिक एकीकरण की पूरी जानकारी मांगी गई है।

सीबीआई और एनजीओ ने किया याचिका का विरोध

सीबीआई के वकील मनफूल विश्नोई और भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (BGIA) के वकील अवि सिंह और प्रसन्ना बी ने अदालत के समक्ष डॉव की याचिका का जोरदार विरोध किया। उनका तर्क था कि चूंकि त्रासदी भोपाल में हुई थी, इसलिए भोपाल की अदालतों को ही मामला सुनने का पूरा अधिकार है — चाहे जांच एजेंसी सीबीआई क्यों न हो।

अगली सुनवाई 23 अगस्त को

अब अदालत इस दिशा में आगे बढ़ते हुए डॉव केमिकल को औपचारिक रूप से इस मामले का पक्षकार मानेगी और अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। इस दिन कोर्ट में उक्त तीनों कानूनी बिंदुओं पर बहस की संभावना है।

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