सस्ती कार्बाइड गन बनी भयंकर, सोशल मीडिया ट्रेंड ने बढ़ाई खतरनाक लोकप्रियता

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भोपाल। दीपावली पर इस बार पटाखों के विकल्प के रूप में बाजार में आई कार्बाइड पाइप गन (Carbide Pipe Gun) ने खतरनाक रूप ले लिया है। इस देसी गन से निकलने वाली गैस और बारीक कार्बाइड कणों ने सैकड़ों लोगों की आंखों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। भोपाल, सीहोर, रायसेन और आसपास के जिलों से अब तक 120 से अधिक आंखों की चोट के मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मरीजों की कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कुछ की आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना हुआ है।

बिना चलाए भी निकल रही थी गैस, घायल हुए कई लोग

सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय में भर्ती सीहोर निवासी एक पीड़ित ने बताया कि वह गन को देख ही रहा था कि अचानक बिना चलाए उसमें से गैस निकली और सीधा आंखों में चली गई। कुछ ही सेकंड में आंखों में तेज़ जलन और धुंधलापन महसूस हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि उसके कॉर्निया में गंभीर क्षति हुई है और सर्जरी करनी पड़ी। उसकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

इसी तरह चौपड़ा कला निवासी  ने बताया कि गन के नीचे लगे लाइटर से अचानक चिंगारी निकली और गैस आंखों में जा घुसी। इससे उसकी पुतली डैमेज हो गई। आनंद समेत कई मरीजों की सर्जरी की गई है।

तीन दिन में 50 से ज्यादा घायल, पांच की हालत नाजुक

सेवा सदन अस्पताल के प्रबंधक ने बताया कि तीन दिनों में 50 से अधिक मरीज इस कार्बाइड पाइप गन से घायल होकर अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से पांच की हालत नाजुक है। उन्होंने बताया कि गैस और जलते हुए कार्बाइड के छोटे कण आंखों के अंदर तक पहुंच रहे हैं, जिससे कॉर्निया पूरी तरह खराब हो रही है।

कैसे काम करती है यह खतरनाक गन?

यह देसी गन दिखने में प्लास्टिक या लोहे की पाइप जैसी होती है। इसमें कैल्शियम कार्बाइड नामक रसायन डाला जाता है। जब यह पानी के संपर्क में आता है तो एसीटिलीन गैस बनती है, जो अत्यधिक ज्वलनशील होती है। इस गैस को लाइटर की चिंगारी से जलाया जाता है, जिससे तेज धमाका होता है। यही धमाका बच्चों को आकर्षक लगता है, लेकिन असल में यह आंखों, त्वचा और चेहरे को गंभीर रूप से झुलसा सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई, बच्चों में बढ़ा क्रेज

कार्बाइड पाइप गन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल वीडियो के कारण बच्चों और किशोरों में तेजी से लोकप्रिय हुई। यह घरेलू तौर पर बनाई जा रही है और बाजार में 100 से 200 रुपये तक में बिक रही थी। पुलिस को आशंका है कि दीपावली से पहले कुछ अस्थायी ठेलों पर इन्हें बिना अनुमति के बेचा गया।

पुलिस जांच में जुटी, बाजार से गायब हुई गन

बैरागढ़ थाना पुलिस ने बुधवार को कई बाजारों में छापे मारे लेकिन गन बेचने वाला कोई विक्रेता नहीं मिला। थाना प्रभारी ने बताया, “अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह गन कहां से आई। कई मरीजों ने बताया कि दीपावली से पहले ठेले पर लोग इन्हें बेच रहे थे। जानकारी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

डॉक्टरों की चेतावनी

सेवा सदन के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. उपाध्याय ने बताया, “हम लगातार अपील कर रहे हैं कि पटाखे या देसी गन जैसे प्रयोगों से बचें। इनसे आंखों की कॉर्निया को स्थायी नुकसान हो सकता है। अस्पताल में भर्ती कई बच्चों की आंखों में कार्बाइड के कण अंदर तक पहुंच गए हैं। ऑपरेशन के बावजूद उनकी दृष्टि लौटने की संभावना कम है।”

परिवारों में चिंता और अफसोस

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में भी ऐसे 36 केस दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सात साल के अलजैन नामक बच्चे की आंखों में कार्बाइड के बारीक टुकड़े घुस गए थे। डेढ़ घंटे की सर्जरी के बाद टुकड़े तो हटा दिए गए, लेकिन अभी भी उसकी आंखों की रोशनी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सावधानी ही सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बाइड पाइप गन जैसी देसी चीज़ों का प्रयोग न केवल खतरनाक है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। इस दीपावली ने यह सबक दिया है कि थोड़े से रोमांच के लिए लापरवाही किसी की जिंदगी और आंखों की रोशनी छीन सकती है।

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