भगवान राम पर विवादित पोस्ट को लेकर संचालक के खिलाफ एफआईआर की मांग”

0
123
Way News
Way News

||जबलपुर|| विजय नगर स्थित जाय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को एक गंभीर विवाद पैदा हो गया, जब स्कूल के संचालक अखिलेश मेबिन पर भगवान राम को लेकर विवादित वॉट्सएप पोस्ट साझा करने का आरोप लगाया गया। हिंदू संगठनों ने इस पोस्ट को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली करार देते हुए, स्कूल में घुसकर हंगामा किया और अखिलेश मेबिन के खिलाफ एफआईआर की मांग की। यह मामला तब सामने आया जब मंगलवार सुबह अखिलेश मेबिन के फेसबुक स्टेटस में भगवान राम और बच्चों को जोड़ते हुए अभद्र टिप्पणी की गई। जैसे ही यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने गुस्से में आकर स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह पोस्ट जानबूझकर धर्मनिरपेक्षता को नुकसान पहुँचाने और धार्मिक उन्माद फैलाने के उद्देश्य से डाली गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस प्रकार की पोस्ट से समाज में धार्मिक तनाव बढ़ सकता है और ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, स्कूल के संचालक ने जानबूझकर धर्म के प्रति असम्मान दिखाया, जिससे पूरे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस कारण, उन्होंने अखिलेश मेबिन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की और एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी।प्रदर्शनकारियों ने स्कूल परिसर में घुसकर विरोध प्रदर्शन किया, तोड़फोड़ की और स्कूल के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद, पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। पुलिस ने स्कूल प्रशासन से बयान लिया और इस मामले में त्वरित जांच शुरू कर दी है। स्थानीय पुलिस ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यदि जांच में स्कूल संचालक पर आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली पोस्टों के खिलाफ भविष्य में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में पूरी निष्पक्षता के साथ जांच की जाएगी। यह घटना शहर के विभिन्न हिस्सों में चर्चा का विषय बन चुकी है। स्थानीय लोग और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि इस घटना को गंभीर मानते हुए, उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में जल्दी कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों से बचा जा सके। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि सोशल मीडिया पर धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं से जुड़ी सामग्री को लेकर सख्त नियमों की आवश्यकता है, ताकि समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखा जा सके।

Publishers Advertisement