इंदौर में ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान का असर: छह महीने में 71 मौतें, 1011 गंभीर रूप से घायल; युवाओं की लापरवाही बनी जानलेवा

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया जा रहा ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान अब सख्ती के दौर में है, और इसके पीछे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले छह महीने में केवल हेलमेट नहीं पहनने के कारण 71 दोपहिया वाहन चालकों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है, जबकि 1011 लोगों को सिर में गंभीर चोटें आई हैं। यह आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि शहर में दोपहिया चालकों के बीच हेलमेट को लेकर अब भी गंभीरता नहीं है।

बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं

1 अगस्त से लागू ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान के तहत शहर के पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट पहुंचे लोगों को ईंधन देने से साफ इनकार किया जा रहा है। अभियान के छठे दिन बुधवार को शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सख्ती देखी गई। हेलमेट न होने पर वाहन चालक या तो वापस लौटते नजर आए या फिर दूसरों से हेलमेट मांगकर पेट्रोल डलवाते दिखे।

आईटीएमएस कैमरे से हुआ खुलासा

शहर के 43 प्रमुख चौराहों पर लगे 385 कैमरों की मदद से पिछले एक साल में 12 लाख 27 हजार से अधिक चालान काटे गए हैं। इनमें से केवल 1.40 लाख चालकों ने चालान की राशि जमा की है। इससे साफ है कि नियम तोड़े जा रहे हैं, पर पालन कराने की प्रक्रिया में अब तक सख्ती की कमी रही है।

युवाओं में सबसे ज्यादा मौतें

नगरीय यातायात विभाग के अनुसार, तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण सबसे ज्यादा मौतें 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवाओं की हो रही हैं। युवाओं के हेलमेट न पहनने की प्रवृत्ति को देखते हुए यातायात विभाग ने चिंता जताई है। एएसपी (यातायात) संतोष कौल ने कहा, “युवाओं को सबसे ज्यादा हेलमेट पहनने की जरूरत है, क्योंकि वे ही सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उनका भविष्य लंबा है, लेकिन एक हादसा सब कुछ बदल सकता है।”

छह महीने में 136 मौतें, 1500 घायल

अकेले पिछले छह महीनों में इंदौर में 1879 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 136 लोगों की मौत और 1500 लोग घायल हुए। इनमें पैदल चलने वालों की मौत की संख्या 44, साइकिल सवारों की 5, कार-टैक्सी एलएमवी से 8, ट्रक-लारी से 2, बस से 1 और ई-रिक्शा से 4 लोगों की जान गई। ऑटो रिक्शा, बस और ई-रिक्शा में भी दर्जनों लोग घायल हुए।

सख्ती के पीछे कानूनी आधार

‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसके अंतर्गत यदि कोई पेट्रोल पंप संचालक बिना हेलमेट पेट्रोल देता है, तो उस पर एक साल तक की जेल या 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पिछले प्रयास क्यों फेल हुए?

इससे पहले भी इंदौर में हेलमेट को लेकर दो बार अभियान चलाए गए थे, लेकिन ठोस रणनीति और निरंतर निगरानी के अभाव में वे जल्द ही ठंडे पड़ गए। वर्तमान कलेक्टर आशीष सिंह के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान को अब तक बेहतर क्रियान्वयन और सख्ती के साथ लागू किया गया है।

आने वाले समय में और कड़ी निगरानी

शहर में स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का विस्तार किया जा रहा है। आगामी समय में 23 नए चौराहों पर अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर डिजिटल निगरानी और तेज कार्रवाई संभव होगी।

हेलमेट न पहनना सिर्फ एक नियम का उल्लंघन नहीं, बल्कि जान का जोखिम भी है। आंकड़े बताते हैं कि लापरवाही की कीमत जान देकर चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की सख्ती तभी रंग लाएगी, जब नागरिक स्वयं अपने जीवन की रक्षा को प्राथमिकता देंगे।

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