इंदौर एमवाय अस्पताल “चूहा कांड” पर हाईकोर्ट का संज्ञान, सरकार से 15 सितंबर तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट

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इंदौर। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में नवजात शिशुओं को चूहों द्वारा कुतरे जाने की शर्मनाक घटना पर अब न्यायपालिका भी सख्त हो गई है। एमपी हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बुधवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से 15 सितंबर तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जे.के. पिल्लई की युगलपीठ ने सरकार से पूछा है कि इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, किन जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गई है और वर्तमान स्थिति क्या है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य सरकार को बताना होगा कि आखिरकार अस्पताल की लापरवाहियों को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।

मामला कैसे सामने आया?

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एमवाय अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एनआईसीयू में भर्ती धार और देवास के दो नवजात शिशुओं की अंगुलियां और शरीर के अन्य अंग चूहों ने कुतर डाले। इस घटना का वीडियो वायरल होते ही पूरे प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हंगामा मच गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

इस बीच राज्य स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी को सौंपी।

  • रिपोर्ट में बताया गया कि घटना के समय प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी की गंभीर लापरवाही रही। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

  • विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजेश लाहोटी को भी पद से हटा दिया गया और उनकी जगह डॉ. अशोक लड्ढ़ा को जिम्मेदारी सौंपी गई।

  • रिपोर्ट में अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल संभालने वाली एजाइल कंपनी की भी बड़ी चूक सामने आई।

इधर, एमवाय अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव अचानक 15 दिन की छुट्टी पर चले गए और प्रभार डॉ. बसंत निगवाल को सौंप दिया।

कागजों में दबा रोडेंट और इंफेक्शन कंट्रोल सिस्टम

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में न तो रोडेंट कंट्रोल कमेटी की बैठकें होती थीं और न ही इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी सक्रिय थी। जबकि दोनों की बैठकें हर माह होना आवश्यक है ताकि चूहों, गिलहरियों और अन्य कुतरने वाले जीवों से मरीजों को बचाने के उपाय किए जा सकें।

पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर गिरी गाज

सरकार ने मुख्य ठेकेदार कंपनी एचएलएल इंफ्रा टेक सर्विस लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वह एजाइल कंपनी का अनुबंध तुरंत समाप्त करे। साथ ही, एमजीएम से जुड़े सभी अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल की निगरानी के लिए डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है। इस कमेटी में डॉ. शेनल कोठारी, डॉ. राजीव लोहोकारे, डॉ. योगिता दीक्षित, डॉ. प्रियंका कियावत और डॉ. पंकज पाराशर शामिल किए गए हैं।

अब सबकी निगाहें कोर्ट की अगली सुनवाई पर

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि 15 सितंबर तक सरकार को रिपोर्ट पेश करनी ही होगी। अब देखना यह है कि सरकार अस्पताल प्रबंधन की खामियों को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

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