
नागपुर || शहर हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के बाद से सुर्खियों में है, लेकिन अब इस हिंसा की प्रकृति को लेकर एक नया और सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। शुरुआती तौर पर इन घटनाओं को अचानक हुई झड़पों के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब ऐसे संकेत और खुलासे सामने आ रहे हैं जो यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या यह हिंसा वाकई स्वतःस्फूर्त थी या फिर किसी गहरी साजिश का हिस्सा थी? विश्वसनीय सूत्रों और कुछ खोजी पत्रकारों की रिपोर्ट्स के अनुसार, नागपुर में हुई हिंसा के पीछे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का एक जटिल जाल बुना गया हो सकता है। ‘सोशल इंजीनियरिंग’ से तात्पर्य है समाज के विभिन्न वर्गों को लक्षित करके, सुनियोजित तरीके से उनके बीच अविश्वास और शत्रुता पैदा करना, जिसका इस्तेमाल बाद में हिंसा और अशांति फैलाने के लिए किया जा सके। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करके गलत सूचनाएं, भड़काऊ बयान और नफरत फैलाने वाले संदेश फैलाए, जिससे समुदायों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के तहत खास तौर पर युवाओं को लक्षित किया गया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया गया। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ संगठित समूहों ने इस पूरी प्रक्रिया में पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हिंसा को एक निश्चित दिशा दी। इस मामले में एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि कुछ ऐसे डिजिटल फुटप्रिंट्स और संवाद सामने आए हैं जो यह दर्शाते हैं कि हिंसा की योजना पहले से बनाई गई थी और इसे एक विशेष पैटर्न के तहत अंजाम दिया गया। हालांकि, पुलिस और प्रशासन अभी भी इन दावों की आधिकारिक पुष्टि करने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि हिंसा में शामिल सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। लेकिन, ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के इन सनसनीखेज खुलासों ने नागपुर के नागरिकों के बीच चिंता और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वाकई उन्हें किसी बड़ी साजिश का शिकार बनाया गया था और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। इस खुलासे के बाद अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां इन नए दावों की कितनी गहराई तक पड़ताल करती हैं और क्या वे उन ताकतों का पर्दाफाश कर पाती हैं जिन्होंने कथित तौर पर नागपुर में हिंसा की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के दुरुपयोग और समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतों की चुनौती को उजागर किया है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
