
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने महिला श्रमिकों के अधिकारों और अवसरों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अब महिलाओं को रात्रि पाली यानी नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दे दी है। यह अनुमति विशेष सुरक्षा प्रबंधों और सख्त नियमों एवं शर्तों के तहत लागू होगी। यह प्रावधान कारखाना (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक के तहत किया गया है, जिसे श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने सोमवार को विधानसभा में प्रस्तुत किया।
महिलाओं को मिलेगा समान अवसर
इस संशोधन के बाद अब महिलाएं भी पुरुषों की तरह दुकानों, मॉल, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और कारखानों में नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए नियोजक (employer) को महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम करना अनिवार्य होगा, जिसमें आवागमन, परिसर सुरक्षा, और आवश्यकतानुसार हॉस्टल/रहवास की व्यवस्था शामिल होगी।
काम के घंटे होंगे निर्धारित
विधेयक के अनुसार, एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे की कार्य अवधि तय की गई है। हालांकि, कर्मचारियों की लिखित सहमति के आधार पर यह समय किसी दिन 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है, जिसमें विश्राम अवधि शामिल होगी।
ओवरटाइम पर दोगुनी मजदूरी
यदि कोई कर्मचारी निर्धारित सीमा से अधिक कार्य करता है, जैसे:
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सप्ताह में 48 घंटे से अधिक,
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किसी दिन 9 घंटे से ज्यादा (सप्ताह में 6 दिन काम करने पर),
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किसी दिन 10 घंटे से अधिक (5 दिन कार्य सप्ताह में),
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किसी दिन 11.5 घंटे से अधिक (4 दिन कार्य सप्ताह में),
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या किसी पेड लीव के दिन कार्य करता है,
तो उसे अतिकाल (ओवरटाइम) की मजदूरी सामान्य वेतन दर से दोगुनी दर पर दी जाएगी।
सरकार को भी रहेगा विशेष अधिकार
राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से बिना अंतराल के काम के घंटों को 6 घंटे तक बढ़ाने का अधिकार भी रखती है, जो आपात स्थिति या विशेष आवश्यकता के समय लागू किया जा सकेगा।
श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और लैंगिक समानता की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगा। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू करना और नियमित निरीक्षण आवश्यक होंगे। मध्य प्रदेश सरकार का यह संशोधन महिलाओं को कार्यस्थलों पर समान अधिकार दिलाने की दिशा में एक साहसिक पहल है। इससे राज्य में महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ेगी और वे पुरुषों के समकक्ष आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।










