इंदौर में आवारा कुत्तों का कहर: परीक्षा देने जा रही छात्रा पर झुंड ने किया हमला, CCTV फुटेज वायरल

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इंदौर। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहगीरों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों पर लगातार हो रहे हमलों से आमजन सहमे हुए हैं। ताजा मामला श्रीनगर एक्सटेंशन का है, जहां सुबह करीब 6:30 बजे कॉलेज परीक्षा देने जा रही एक छात्रा पर चार कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। इस हमले में छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्रा रोज की तरह पैदल कॉलेज जा रही थी, तभी अचानक चार आवारा कुत्ते उसके सामने आ गए। उनमें से एक ने उसकी पैंट खींची, जिससे वह संतुलन खो बैठी और जमीन पर गिर पड़ी। इसके बाद एक कुत्ते ने उसके पैर को नोंचा और काट लिया। छात्रा ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया और लात मारकर कुत्तों को भगाने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही वह उठने लगी, कुत्ते फिर से उस पर टूट पड़े।

घटना का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पूरी वारदात साफ नजर आ रही है। फुटेज में दिख रहा है कि हमले के कुछ ही देर बाद छात्रा की एक दोस्त स्कूटी से वहां पहुंची और उसने कुत्तों को भगा दिया। हमले से डरी-सहमी छात्रा चक्कर खाकर गिरने लगी। तभी पास ही रहने वाले एक दंपती ने उसे देखा और तुरंत घर ले जाकर प्राथमिक सहायता दी।

क्षेत्रवासी नाराज़, निगम पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में कुत्तों ने किसी पर हमला किया हो। श्रीनगर एक्सटेंशन और आसपास के इलाकों—खासकर सोनिया गांधी नगर—में कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पास की कॉलोनियों में लोग रोजाना रात को झूठन फेंकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में कुत्ते एकत्र हो जाते हैं।

“हम कई बार नगर निगम से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। निगम का वाहन जरूर आता है, पर रात में फिर वही हाल हो जाता है,” एक रहवासी ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा।

छह माह में 22 हजार से ज्यादा लोग बने शिकार

शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। शासकीय आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2025 के बीच इंदौर में 22,000 से अधिक लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हुए। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 46,249 तक पहुंच गया था, जब पीड़ितों ने हुकुमचंद पाली क्लिनिक और अन्य चिकित्सा केंद्रों में इलाज करवाया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इंदौर में आवारा कुत्तों की समस्या अब एक गंभीर जनस्वास्थ्य और सुरक्षा संकट का रूप ले चुकी है।

क्या कहता है प्रशासन?

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय टीमों को नियमित रूप से अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन बढ़ती शिकायतों और ग्राउंड रियलिटी को देखकर यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। नगर निगम को चाहिए कि वह कुत्तों की ब्रीडिंग रोकने, उन्हें आश्रय स्थलों में भेजने और भोजन स्रोतों को नियंत्रित करने जैसे स्थायी कदम उठाए।इंदौर जैसे बड़े शहर में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ आमजन की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता की ओर भी इशारा करती हैं। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।


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