
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को एक अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध देखने को मिला। पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पुलिस की वर्दी पहनकर प्रदर्शन किया। इस विरोध का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किया। उन्होंने इस घोटाले की तुलना कुख्यात व्यापमं घोटाले से करते हुए इसे ‘व्यापमं पार्ट-2’ करार दिया।
प्रतीकात्मक प्रदर्शन से गरमाया सदन का माहौल
कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में पुलिस की प्रतीकात्मक वर्दी पहनकर नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाए। उमंग सिंघार ने कहा, “यह भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार से सनी हुई है। इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। विधानसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ और विपक्ष ने सरकार से तत्काल जवाब मांगा।
महिलाओं पर अत्याचार के आंकड़े चौंकाने वाले, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित जो आंकड़े पेश किए, उन्होंने सदन को झकझोर कर रख दिया।
जनवरी से जून 2025: हर दिन 20 बलात्कार, 33 अपहरण
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जनवरी-जून 2025 के बीच राज्य में 3,742 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए।
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इनमें अनुसूचित जाति की 905, अनुसूचित जनजाति की 1,143, पिछड़ा वर्ग की 1,228 और सामान्य वर्ग की 466 महिलाएं शामिल हैं।
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120 सामूहिक दुष्कर्म के मामले भी सामने आए हैं।
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इसी अवधि में 5,868 अपहरण के मामले भी दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन औसतन 33 अपहरण।
सजा दर में भारी गिरावट
सीएम द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार:
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वर्ष 2024 में बलात्कार के मामलों में सिर्फ 2.79% दोषियों को सजा हुई।
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जबकि 2018 में यह दर 12.43% थी।
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सामूहिक दुष्कर्म में सजा दर 2024 में 1.63% रह गई, जबकि 2018 में 16.25% थी।
7 वर्षों में 54,000 से ज्यादा दुष्कर्म
वर्ष 2018 से 2024 के बीच:
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कुल 54,067 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए।
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इनमें अनुसूचित जाति की 14,258, अनुसूचित जनजाति की 14,804, पिछड़ा वर्ग की 18,942 और सामान्य वर्ग की 6,063 महिलाएं शामिल थीं।
आंकड़ों में भ्रम?
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सरकार से यह सवाल भी किया कि जब वार्षिक प्रतिवेदन में 2024 में बलात्कार के 5,592 मामले बताए गए थे, तो जवाब में 8,518 मामलों का उल्लेख क्यों किया गया — जो 60% अधिक है।
सरकार ने जवाब में कहा, “अक्सर पीड़िता की बरामदगी के बाद, यदि बलात्कार की पुष्टि होती है तो अपहरण के मामलों को बलात्कार में परिवर्तित किया जाता है। इसी कारण आंकड़ों में बढ़ोत्तरी और बदलाव संभव है।”
कांग्रेस का तीखा हमला, सरकार की घेरेबंदी
कांग्रेस ने विधानसभा में हुए प्रदर्शन और महिला अपराधों के आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विपक्ष ने मांग की है कि:
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कांस्टेबल भर्ती घोटाले की न्यायिक जांच करवाई जाए।
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महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सजा दर सुधारने के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाए।
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भर्ती और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। मध्य प्रदेश विधानसभा में एक ओर जहां भ्रष्टाचार और भर्ती घोटालों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आंकड़ों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की वर्दी में विपक्ष का यह विरोध राजनीतिक और नैतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकता है।










