ग्रामवासियों की मांग: गांव में बोरिंग नहीं तो प्रशासन बेकार!

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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के गोभा गांव में पानी की भारी किल्लत के कारण ग्रामीणों को गंदा और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव के लोग लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई हैंडपंप और जल स्रोत पूरी तरह से सूख चुके हैं। पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के इलाकों में भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार मांग की कि गांव में बोरिंग करवाई जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस लापरवाही से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रशासन का कहना है कि ‘हर घर जल योजना’ के तहत पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है और जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने भरोसा दिलाया है कि अगले तीन महीनों में जल जीवन मिशन के तहत सभी को शुद्ध पानी मिलेगा और गांव की पानी की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी ऐसे कई आश्वासन सुन चुके हैं, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है।गांव के लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही उनकी पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी कई बार प्रशासन के पास अपनी शिकायत लेकर गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो सकते हैं, इसलिए वे इस बार अपनी मांग को लेकर आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं। गांव में पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। पहले जिन हैंडपंपों से पानी आता था, वे अब सूख चुके हैं। ग्रामीणों के पास पीने के साफ पानी के लिए कोई दूसरा साधन नहीं है। वे मजबूरी में तालाबों और गंदे जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। गोभा गांव के लोगों के लिए पानी की समस्या किसी संकट से कम नहीं है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इस समस्या का हल निकाल लिया जाएगा, लेकिन गांव वालों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहिए। यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जाएंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार अपने वादे पर कितना खरा उतरता है।

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